कुछ ख्वाबों का पल जो चलते चलते सोचता हूं ।
वो चोट जो तुमने बिना दाग के दिये
और वो दर्द जिसे तुमने आने दिया
वो दर्द का एहसास नहीं किया
हो सकता है तुम्हें दर्द की चोट नहीं मालूम
क्या यह सच है कि तुम एक नए ख्वाबों को दौर रहीं
उसका जवाब जिसे मैं जान कर पूछा नहीं और तुमने
फिर तुमने पागलपन सोच लिया
तुमने ही कहा था कई शब्द जिसने झिंझोड दिया था
शायद तुमने अंतिम में अब जा कर पूछा
शायद। मेरे पास पैसे नहीं थे
अब तक तो लोग कहते हैं
प्यार अंधा होता है
पर अब प्यार बिकाऊ होता है...राजीव