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हर शख़्स आईने की तरह नहीं होता......!

रंजीत कुमार अर्णव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर शख़्स आईने की तरह नहीं होता।
        
                                                    
                            
हर चेहरा सच्चा-ए-बयां नहीं होता।
कुछ लोग मिलते हैं मतलब के लिए।
हर ताल्लुक़ दिल से बयां नहीं होता।
आईना तो वही दिखाता है जो सच है।
इंसान का हर किरदार मुफ़िक नहीं होता।
कुछ मुस्कुरा के भी दर्द छुपा लेते हैं।
हर अश्क आँखों से रवां नहीं होता।
-अर्णव.....
एक दिन पहले
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