मेरे लहजे में
नफ़रत हो जाएगी तुझे मुझसे,
अगर मैं तेरे लहजे में बात करूँ,
जो बातें तू रोज़ कहता है मुझे,
अगर वही बातें मैं तुझसे कह दूँ।
शायद एक पल भी न टिकेगा तू,
मेरे साथ इस रिश्ते में,
फिर सोच—मैं कैसे रहती हूँ,
तेरे हर कठोर शब्द के हिस्से में।
प्रेम का अर्थ सहते जाना नहीं,
न ही चुप रहना हर बार,
प्रेम तो वह है जहाँ दोनों के शब्दों में
बचा रहे एक-दूसरे का सम्मान।
मैं तुझसे दूर नहीं होना चाहती,
बस इतना चाहती हूँ—
जिस लहजे में तू मुझसे बात करता है,
उसी लहजे की चोट
तुझे कभी खुद न सहनी पड़े।
-रजनी