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लफ़्ज़ों की लड़ाई

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लफ़्ज़ों की लड़ाई
        
                                                    
                            

शुक्रिया करूँ मैं अपनी लड़ाई को,
या शुक्रिया करूँ तेरी लड़ाई को,
कविता तो बनती है इसी
लफ़्ज़ों की लड़ाई में।

शुक्रिया करूँ अपनी मूर्खता को,
या करूँ तेरी चालाकियों का,
तूने जो दिया दर्द,
वही तो कारण बना मेरे अल्फ़ाज़ों का।

तूने मुझे तोड़ा,
मैंने ख़ुद को शब्दों में जोड़ लिया,
तूने जो समझा कमज़ोर मुझे,
मैंने उसी दर्द को अपना हुनर बना लिया।

अब सोचती हूँ—
शुक्रिया तेरा करूँ
या अपनी नादानियों का,
क्योंकि तेरी चालाकियों ने ही
मुझे आईना दिखाया मेरी कहानियों का।

जो कभी आँसू थे,
आज वही कविता बन गए,
हम हारकर भी
अपने अल्फ़ाज़ों में जीत गए।

- रजनी
19 घंटे पहले
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