इंसानों की वेदना पढ़ लो
वेद कोई पढ़े या न पढ़े,
अगर तुमने इंसानों की वेदना
पढ़ना सीख लिया,
तो समझो तुमने
चारों वेद पढ़ लिए।
किताबों के अक्षरों को पढ़ना
ज्ञान हो सकता है,
मगर किसी की आँखों में छिपे दर्द को पढ़ लेना
इंसानियत है।
किसी की ख़ामोशी में छिपी पुकार,
किसी की मुस्कान के पीछे का दर्द,
बिना कहे किसी की तकलीफ़ समझ लेना—
यही तो सच्चा ज्ञान है।
मंदिरों में मंत्र पढ़ते रहो,
ग्रंथों के पन्ने पलटते रहो,
मगर अगर सामने खड़े इंसान का दर्द
तुम्हें दिखाई ही न दे,
तो अधूरा ही रह जाएगा तुम्हारा ज्ञान।
क्योंकि वेदों का सार
शायद शब्दों से कहीं आगे है—
जहाँ इंसान, इंसान की पीड़ा समझे,
वहीं से सच्चा धर्म शुरू होता है।
-रजनी