विज्ञापन

ग़म क्यों खरीद लाए हम

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ग़म क्यों खरीद लाए हम
        
                                                    
                            

अब तलक ये समझ न पाए हम,
तेरा ग़म क्यों खरीद लाए हम।

सोचा था अपना ग़म दूर होगा,
तेरे ग़म को अपना बनाकर,
पर मालूम न था—
किसी और के ग़म में झुककर
होते नहीं कम,
बल्कि बढ़ जाते हैं अपने ही ग़म।

तुझे संभालने निकले थे हम,
और खुद को ही कहीं खो आए हम,
अब तलक ये समझ न पाए हम,
तेरा ग़म क्यों खरीद लाए हम।
-रजनी
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sanjay

2 कविताएं

View Profile

Sooba Lal

520 कविताएं

View Profile