जमाल के संग
झूठ भी आता है
गुलाब के संग
कांटा भी रहता है
मैने अपनी,
हारों से सीखा है
कई बार दिल,
बिन-चीखे चीखा है
दोस्ती से,
नफरत ना होए!
एक-आध में तो
हम सम्मलित होएं...
थोड़ा और उथल पुथल
का साल हो ले
जितनी और चुभनी है
वो यादें चुभ लें
रहम पर ही
मकाम मिल जाए 🙏
दर-ब-दर ना फिरें...
ना और छिल पाएं
-राहुल
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