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दर-ब-दर ना फिरें... ना और छिल पाएं

                
                                                         
                            जमाल के संग
                                                                 
                            
झूठ भी आता है

गुलाब के संग
कांटा भी रहता है

मैने अपनी,
हारों से सीखा है

कई बार दिल,
बिन-चीखे चीखा है

दोस्ती से,
नफरत ना होए!

एक-आध में तो
हम सम्मलित होएं...

थोड़ा और उथल पुथल
का साल हो ले

जितनी और चुभनी है
वो यादें चुभ लें

रहम पर ही
मकाम मिल जाए 🙏

दर-ब-दर ना फिरें...
ना और छिल पाएं

-राहुल


.
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26 minutes ago

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