देख कर भंवरा तितली, देख कर खिला फूल
आज जरा फुर्सत में हूं, मै हर गम गया हूं भूल
जाने कैसा होगा आने वाला कल
चैन से तो जी लूं, आज का ये पल
चाह नही कोई धमाल करूं ,करूं कोई कमाल
बस चाहत इतनी सी है, समय से मिल जाए रोटी दाल
इस दुनिया की दौलत जाए जिसके किस्से में
चैन से दो पल जी लूं, बस यही आए मेरे हिस्से में
मुझसे ना हो कभी किसी का कोई बुरा
हर गम का डट कर करूं सामना,
बस इतनी हिम्मत मुझको देना मेरे खुदा
लूटाने के नाम पर हमने कितना कुछ लुटाया है
पर जो मुझको पाना था अब तक नही वो पाया है
कुछ लोगों का यहां ऐसा है नसीब
जो कभी कुछ किया नही, हर कुछ उनके है करीब
उम्र भर हमने अब तक यही किया है
हासिल तो कुछ हुआ नही ,बस डर डर के जिया है
-रविन्द्र अमन