समस्त मित्रों एवं भाइयों !
आज हिंदुस्तान की दशा क्यों बिगङती चली जा रही है ? "इसके कारणों पर प्रकाश डालते हुए प्रस्तुत है : कविता ---
" कैसे सुधरे दशा देश की ? मतलब का जग सारा .
पर दुख लखे ना कोई किसी का , बस अपना तन प्यारा .
खुद पर मरता जीता जिंदगी , लाज तजी इंसान !
कैसे हो नव युग निर्माण !!
लैपटॉप कंप्यूटर TV , मोबाइल खूब चलाते .
फिल्म कॉमेडी गेम खेलकर , अपना समय बिताते .
मरते सैनिक जो सीमा पर , कोई रखे ना ध्यान !
कैसे हो नव युग निर्माण !!
रुपया पर बिकता क्यों प्राणी , अपनी शान गवां कर .
बाद में फिर पछताता तू ही ,इज्जत धूर मिलाकर .
राष्ट्रभक्ति का नाम नहीं अब , व्यर्थ में बने महान !
कैसे हो नव युग निर्माण !!
अपने दोष छिपाकर सारे , गुण मुख से बतलाते .
हो गलती थोङी कोई से तो ,आग की तरह फैलाते .
बलहीनों पर जोर दिखाकर , बनते हैं बलवान !
कैसे हो नव युग निर्माण !!
अंधविश्वास अधर्म व हिंसा , इन पर रखते विश्वास .
आडंबर फैलाते व्यर्थ के , धन की मन में आश .
कहते गाथा अपनी बहु - जन , तज कर निज सम्मान !
कैसे हो नव - युग निर्मान !!
रखते रायफल छुरा तमंचा , गलत प्रयोग हैं करते .
निज रक्षा का ख्याल नहीं , आपस में सभी लङ मरते .
करते ताकत खत्म राष्ट्र की , बढ़ता पाकिस्तान !
कैसे हो नव - युग निर्माण !!
नहीं एकता लोगों में , यश धन की होड़ लगाते .
इसी बात का लाभ उठाकर , चीन पाक बढ़ जाते .
होती पराजय जन - जन की , जाती देश की शान !
कैसे हो नव - युग निर्माण !!
अपना कर्म धर्म सब तजकर ,पर मारग पर चलते .
होता तब अपमान जिंदगी के , पुष्प कभी नहीं खिलते .
कहें कवि पुष्पेंद्र सिंह यदुवंशी , सुधरो सवहि जहान !
कैसे हो नव युग - निर्माण ?!!
लेखक कवि पुष्पेंद्र सिंह यादव
दिवियापुर औरैया
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