विज्ञापन

टेलीविजन

Pushpa sahu

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टेलीविजन पर कार्यक्रम की कतार
        
                                                    
                            
टेलीविजन में समाया हुआ संसार

मनोरंजन का मानो खजाना था
शिक्षा जागरूकता का था संचार

देश-दुनिया खेल-जगत की खबर
मौसम विभाग और वाणिज्य व्यापार

रविवार की रंगोली हो या फिल्म
साथ बैठकर देखता था पूरा परिवार

जंगल का मोगली हो या हीमैन
या हो फिल्मी गीतों का चित्रहार

शाक्तिमान की अजब दुनिया हो
या अलिफ लैला के जादुई चमत्कार

पंचतंत्र की रोचक कहानियाँ हो
या रंगारंग कार्यक्रमों की हो बहार

कृषि दर्शन हो या क्रिकेट का मैच
या हो देश विदेश के जरुरी समाचार

मौज मस्ती करता था नन्हा बचपन
कार्टून देखता था हर एक रविवार

दूरदर्शन चैनल पर लगता था मेला
मनोरंजन से जैसे सजा हो बाजार

रविवार की सुबह होती थी खास
पूरे दिन टीवी खुलता था बार बार

एकलौता चैनल था दूरदर्शन हमारा
सबसे मिलता था जिसे भरपूर प्यार

वो दिन सुहाने वो गुलाबी सी शाम
मानो टेलीविजन था खुशी का आधार
-पुष्पा साहू
9 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10387 कविताएं

View Profile

Pradeep Mukherjee

1239 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12527 कविताएं

View Profile