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तुमने कोई ख्वाब न देखा !

Professor Ravindra Pratap Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुमने कोई ख्वाब न देखा !
        
                                                    
                            
(अज़ाम अबीदोव की उज़्बेकी कविता
मूल कवि : अज़ाम अबीदोव
काव्यानुवादक : प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह)
आज़ादी से भरती आत्मा
तेज़ रोशनी जैसे दमके, उधर तुम्हारी बुझी ख्वाहिशें
तुमने कोई ख्वाब न देखा !
(मूल : अ हाइकू)


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