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मुझे मिलेगी मेरी प्रियतम

Professor Ravindra Pratap Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझे मिलेगी मेरी प्रियतम
        
                                                    
                            

(अज़ाम अबीदोव की कविता
मूल कवि : अज़ाम अबीदोव
काव्यानुवादक : प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह)

रात संग फिक्रें ले आती
अरे, कहाँ हो , देखें तुमको
भाव यहाँ पे कितने व्याकुल
मैं बेचारा पड़ा अकेला !

तीखे और अश्रु रोओ ,तुम नैन हमारे,
बुझ भी जाओ , तो भी मैं बस ठीक कहूंगा,
कहीं गुजर है नहीं हमारी , दुनिया भर में
क्या आसमान हमको ले लेगा , सोच रहा हूँ ।

चाँद , अरे तुम दिल न तोड़ो ,
रात गये मत छुप जाना ।
खिड़की बन कर मुझे दिखाना ,
चमत्कार का देश कहाँ है ।

लेकर रोशन पास सितारा ,
तुम तक मैं आ पहुँचूँगा।
आगे जब मैं बढ़ जाऊंगा
इस दुनिया का इंशा हूँगा ।

मुझे मिलेगी मेरी प्रियतम ,
शुचिता में सर्वोपरि होगी ।
नाम वफ़ा मैं उसको दूंगा ,
चमत्कार दे उसे तख़ल्लुस।

घिर घिर आती रात दीखती,
दिल फिर से हरकत में आता ।



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6 वर्ष पहले
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