कि वो मेरी है, मैं उसका हो नहीं सकता,
ये इन रिश्तों की अजीब-सी उलझन है।
रूह का रिश्ता है, पर जिस्म की दीवारें हैं,
इस दर्द-ए-मोहब्बत की बस इतनी-सी कहानी है।