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मेरी कब्र पर

priyanka yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी कब्र पर उसने,अपनी
        
                                                    
                            
खुशियों का महल बनाया

मेरे दिल के बीचोंबीच
कीलों का जाल बिछाया

फिर उसने पत्थर कांटो को
मुझ पर है फिकवाया

अंगारो सी जली हुई मैं
हर अंग ने अश्रु बहाया
दुश्मन भी रो देता मुझ पर
उसको न रोना आया

न भरा उसका मन इससे भी तो
किसी और को साथ ले आया

दिल पीर बढ़ी मेरी मौत खड़ी
पर उसे तरस न आया

मेरी कब्र पर उसने, अपनी
खुशियों का महल बनाया ।

 हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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