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मेरी कब्र पर

                
                                                         
                            मेरी कब्र पर उसने,अपनी
                                                                 
                            
खुशियों का महल बनाया

मेरे दिल के बीचोंबीच
कीलों का जाल बिछाया

फिर उसने पत्थर कांटो को
मुझ पर है फिकवाया

अंगारो सी जली हुई मैं
हर अंग ने अश्रु बहाया
दुश्मन भी रो देता मुझ पर
उसको न रोना आया

न भरा उसका मन इससे भी तो
किसी और को साथ ले आया

दिल पीर बढ़ी मेरी मौत खड़ी
पर उसे तरस न आया

मेरी कब्र पर उसने, अपनी
खुशियों का महल बनाया ।

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7 वर्ष पहले

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