विज्ञापन

संविधान का पन्ना पन्ना

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            संविधान का पन्ना पन्ना है गाथा बलिदानों की
        
                                                    
                            
त्याग समर्पण की प्रतिमूर्ति कहानी वीर जवानों की
संसद की एक एक ईंट बलिदानी रक्त से रंगी हुई है
अमर शहीदों की अस्थि पर नींव इसकी धरी हुई है
धर्म मजहबों को तज सब सबने केसरिया अपनाया था
पूरा भारत उस दिन एक बलिदानी खून में नहाया था
अमर तिरंगे में जिन बलिदानों के रक्त दिखाई देते हैं
अशोक चक्र की तीली में स्वर जिनके सुनायी देते हैं
आज उन्ही स्वरों का वंदन करने का शुभ दिन है।
आज उन्ही शोणित का पूजन करने का शुभ दिन है।।
आज़ादी की खातिर जो कफन बांध के चलते थे
अमर तिरंगा भारत का हाथों मे थाम के चलते थे
वे दधीच के सुत थे अस्थि देकर चले गए
परतंत्रता की जड़ों में बीज स्वन्त्रता के बोकर चले गए
बलिदानों की एक झलक तब झांसी ने भी देखी थी
मर्दानी ने अंग्रेजों संग जब होली खून की खेली थी
आज़ादी की खातिर उपनाम 'आज़ाद ' बताया था
वो भारत का सिंह सपूत तब देवलोक से आया था
वो मर्यादित भी था मानो वो शेषनाग अवतारी था
अपना सब कुछ खो बैठा ,वो माता पर बलिहारी था
झांसी की रानी मर्दानी तब 'राम धनुर्धर'सी दिखती थी
शेखर की पिस्तौल तब 'चक्र सुदर्शन'सी चलती थी
आज उसी 'पिस्तौल' का वंदन करने का शुभ दिन है।
आज उसी 'मर्दानी' को नमन करने का शुभ दिन है।।
जो हंसते हंसते फांसी के फन्दों पर जाकर झूल गए
निज कर्त्तव्य धर्म अपना वो सब कुछ माँ पर भूल गए
उन बेटों ने माँ की आज़ादी का प्रण तब ठाना था
भारत माँ को जननी से देश को घर तब माना था
गुलामी युक्त धरा पर जिसने एक भूचाल ला दिया था
देश के तरुण वीरों में एक नया उबाल ला दिया था
जिनकी सिंह गर्जना से शत्रु भी कांपा करते थे
माँ के निश्छल बेटों से उनका रक्त जो मांगा करते थे
"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा" का नारा जिसने लगाया था
वो रौद्र रूप धारण कर तब' नेता जी ' बोस कहाया था
आज उसी' बोस' को नमन करने का शुभ दिन है।
आज उसी ' भगत ' का वंदन करने का शुभ दिन है ।।
गौ माता के अपमानों का बदला जो लेकर चले गए
वो शहीद पांडे भारत को नया 'मंगल' देकर चले गए
अपनी सांसो से भी प्यारा जिसको इंकलाब था
वो भारत का गौरव 'बिस्मिल ' माँ का अनोखा लाल था
आज़ादी की अखंड आग में हर भारतीय ने हिस्सा लिया था
सिखों ने अपने दो-दो बेटो को जिंदा तब चिनवा दिया था
जिन वीरों का वरण करने में मृत्यु भी सकुचाती थी
दुल्हनी वेश में सजी खड़ी वो मन ही मन घबराती थी
रण क्षेत्र को अपलक निहार अविरल अश्रु बहाती थी
सागर से बहते अश्रु को रोक नहीं वो पाती थी
आज उसी 'पगड़ी' को नमन करने का शुभ दिन है।
आज उसी 'बिस्मिल' का वंदन करने का शुभ दिन है।।
अमर शहीदों का गायन रामायण कुरान सा लगता है,
लगता है मानो जैसे कोई तुलसी की माला भजता है,
जिनके दर्शन करने मात्र से सभी पाप कट जाते हैं,
जिनका वंदन करने को सभी एक राग हो जाते हैं ,
जिनकी अंतिम सांसों पर हिमालय से पर्वत झुक जाते हैं,
औऱ देवता देवलोक से उन पर पुष्प बरसाते हैं ,
आज उन्ही 'हिमालय सुतो' का वंदन करने का शुभ दिन है।
आज उन्ही वीरो का अभिनंदन करने का शुभ दिन है।।


प्रियंका शर्मा
भगवानपुर,मेरठ(उ.प्र.)


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1570 कविताएं

View Profile