विज्ञापन

सावन भी बरसता है मेरे आलिंगन को

priyanka samariya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्यार का कबूलनामा गुलाब से ही क्यूँ, महकती सी गुलाबी खूशबू के दीवाने क्यूँ,
        
                                                    
                            
यार मेरे कभी देख उस पिताम्बर ओढ़ी हुई सूरजमुखी को,
जैसे थाम रही हो ढलती शाम को, हाय इतना इतरा रही हैं,
देख मुझे कह रही हैं न महकाऊ बघिया को फिर भी सूरज मुझे देख आहे भरता है,
सावन भी बरसता है मेरे आलिंगन को,
इक तु कन्याकुमारी पीली पहने समझे खुद को सूरजमुखी, फिर इक मैं ही सूरजमुखी सूरजमुखी।
-प्रियंका सामरिया
53 मिनट पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7572 कविताएं

View Profile