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आसमां के मोती

Priyanka kashyap

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आसमां के मोती बरस रहे है,
        
                                                    
                            
आज एक अरसे के बाद।
मन चाहता है, इन्हें,.....
समेट के छुपा लूं , कहीं .....।
जैसे छुपाती हैं, ये धरा,
अपने आंचल के तले।
समेटता हैं, जैसे ये समंदर .....
अपनी लहरों के परे।
इक बार जो समेट पाऊं,
तो सजा लूं, किसी सपने की तरह।
हिफ़ाज़त रखूं , बरकरार मैं,
बिल्कुल किसी सपने की तरह।।
एक घंटा पहले
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