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आसमां के मोती

                
                                                         
                            आसमां के मोती बरस रहे है,
                                                                 
                            
आज एक अरसे के बाद।
मन चाहता है, इन्हें,.....
समेट के छुपा लूं , कहीं .....।
जैसे छुपाती हैं, ये धरा,
अपने आंचल के तले।
समेटता हैं, जैसे ये समंदर .....
अपनी लहरों के परे।
इक बार जो समेट पाऊं,
तो सजा लूं, किसी सपने की तरह।
हिफ़ाज़त रखूं , बरकरार मैं,
बिल्कुल किसी सपने की तरह।।
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1 hour ago

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