विज्ञापन

एक कहानी आजादी की

Priya Mehra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बेख़ौफ़ आज़ाद जीना है मुझे,
        
                                                    
                            
नहीं बंधना चाहती मैं किसी बंधन में।
मुझे बंधना है सिर्फ एक स्वतंत्र प्रेम में, जहां न हो कोई बंधन।
मैं नहीं बनना चाहती एक अच्छी बेटी, और न ही बंधना चाहती
एक पत्नी के बंधन में और नहीं चाहती एक बहू होने का दर्जा।
मैं बनना चाहती हूं एक बेबाक लड़की, बंधना चाहती हूं ऐसे प्रेम में जहां हो मेरे विचारों को आजादी जहां मुझे एक स्त्री नहीं, एक लड़की नहीं बल्कि मिले एक इंसान का दर्जा।
ऐसा इंसान जिसे आज़ादी हो खुद के साथ समय बिताने की आज़ादी हो
रात को सड़क पर अकेले चलने की । जिसे मिले ऐसा कंधा जो उसे शरीर नहीं बल्कि समझे एक कोमल हृदय इंसान ।
जो रखे उसे आज़ाद उसके शब्दों से
जो रखे आज़ाद उसे हर बंधन से जो न बांध सके उसके विचारों को और न बांध सके उसकी आजादी के पंखों को।
क्योंकि उसका भी हक है आजादी स्त्री से पहले है वो एक कोमल हृदय इंसान ,जिसके हृदय में है दयालुता, प्रेम और समर्पण उसे भी हक है एक स्त्री से ज्यादा एक इंसान के जैसे जीने का क्योंकि ये कहानी है उसकी आजादी की,क्योंकि ये कहानी है उसकी आजादी की।
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anurag vishwkarma (aiyaar)

8 कविताएं

View Profile

विजय कुमार

172 कविताएं

View Profile

Priya Mehra

1 कविता

View Profile