कुछ इतने ही दूर हैं हम और तुम,
जितनी चांद से सूरज की लाली है।
कैसे लिखूं तेरी- और मेरी कहानी,
तेरी ज़िंदगी का कोई पन्ना कहां खाली है।
तेरी दुनिया में जाने कितने मौसम हैं,
मेरे हिस्से में तेरी सुबह निराली है।
मैंने ख़ुद को तेरी राह में पाया ज़रूर,
पर वहां तो किसी और की रखवाली है।
मैंने चाहा कि तुझे अपना कहूं, फिर सोचा,
तेरी ख़ुशियों से बड़ी कौन-सी ख़ुशहाली है?
प्यार वो क्या जो किसी को रखा जाए बांध कर,
प्यार का मतलब तो प्यासे की प्यास बुझानी है।
कल अगर तेरे किसी ख़्वाब में मेरा नाम आए,
तो समझ लेना कि दूरी कुछ तो घटने वाली है।
और अगर उम्र भर फ़ासला ही रह जाए,
फिर भी ये चाहत कहां कम होने वाली है।
उसे पाने की तमन्ना अपनी जगह है "प्रिंस"
मगर उसकी मुस्कान सबसे बड़ी ख़ुशहाली है।
वो मेरी हो ये ज़रूरी तो नहीं इश्क़ के लिए,
उसकी दुनिया में रहे सुकून यही तो मेरी दीवाली है।