देकर जी भर के दुआएं तुम्हें सिर्फ आज़ तो तसल्ली से हमें जी लेने दो जला कर दिया आस का अर्ज हमें करने दो
जिंदगी मेरी हुई आसान कब ये सच तुम्हें शायद पता नहीं अब आजमा के बार बार तुम्हें हुआ जो हमें दर्द कहने दो
बदल कर मिजाज़ गर खुश हो तो मर्जी आपकी सिखाया तुमने ही जीना हमें अंधेरों में अब कुछ गिला हमें करने दो
सच तो ये भी दुनिया बदनसीबों की होती बिलकुल अजीब बढ़ा कर ताल्लुक साथ दो या ना दो फर्ज हमें निभाने दो
अब तो बस इक सूरत सुलह की हमें दिखने लगी है फैसला जो होगा देख लेंगे मगर अभी तो हमें चैन से जी लेने दो