आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तराना ए बेचैन दिल

                
                                                         
                            देकर जी भर के दुआएं तुम्हें सिर्फ आज़ तो तसल्ली से हमें जी लेने दो जला कर दिया आस का अर्ज हमें करने दो
                                                                 
                            
जिंदगी मेरी हुई आसान कब ये सच तुम्हें शायद पता नहीं अब आजमा के बार बार तुम्हें हुआ जो हमें दर्द कहने दो
बदल कर मिजाज़ गर खुश हो तो मर्जी आपकी सिखाया तुमने ही जीना हमें अंधेरों में अब कुछ गिला हमें करने दो
सच तो ये भी दुनिया बदनसीबों की होती बिलकुल अजीब बढ़ा कर ताल्लुक साथ दो या ना दो फर्ज हमें निभाने दो
अब तो बस इक सूरत सुलह की हमें दिखने लगी है फैसला जो होगा देख लेंगे मगर अभी तो हमें चैन से जी लेने दो
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर