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इलसिला ए मजबूर जिंदगी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारे राह में आई सारी रुकावटें कुछ तो कम कीजिए गर ना हो मुमकिन तो राह ए तलब हमें धोखा आप मत दीजिए
        
                                                    
                            
इक तो गुस्ताखियां तेरी और सच्चाइयां मेरी जो कर ही ना पाए सामना इक दूजे का ये अहसान भी आप मत कीजिए
अपना कर हुनर फकीरी का मिला कब चैन ओ सकूं किसी को बुझा के दिया आस का नाकाम हमें आप मत कीजिए
सच ये है मेरी खुशियों को तुमने खुशी अपनी कभी जाना कहां करके वादे हजार दर्द और शुमार आप मत कीजिए
बिछा कर पलकें करूं कब तक इंतजार तेरा छीन कर खुशियां सारी हमें कोई सौगात ए दर्द भी आप मत दीजिए
एक दिन पहले
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