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इलसिला ए मजबूर जिंदगी

                
                                                         
                            हमारे राह में आई सारी रुकावटें कुछ तो कम कीजिए गर ना हो मुमकिन तो राह ए तलब हमें धोखा आप मत दीजिए
                                                                 
                            
इक तो गुस्ताखियां तेरी और सच्चाइयां मेरी जो कर ही ना पाए सामना इक दूजे का ये अहसान भी आप मत कीजिए
अपना कर हुनर फकीरी का मिला कब चैन ओ सकूं किसी को बुझा के दिया आस का नाकाम हमें आप मत कीजिए
सच ये है मेरी खुशियों को तुमने खुशी अपनी कभी जाना कहां करके वादे हजार दर्द और शुमार आप मत कीजिए
बिछा कर पलकें करूं कब तक इंतजार तेरा छीन कर खुशियां सारी हमें कोई सौगात ए दर्द भी आप मत दीजिए
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12 घंटे पहले

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