जिक्र अपनी बरबादियो का अब कहना पड़ेगा बढ़ा
कर फासला तुमसे फिर भी सच कहना पड़ेगा
मिटा कर चैन ओ सकूं दर्द किसी का बढ़ाया नहीं करते
होकर मायूस वफाओं से दर्द सहना पड़ेगा
किया जो नाकाम तुमने जो जिंदगी मेरी बगावत कभी मैं
कर सकता नहीं बात दिल की कहना पड़ेगा
जला कर दिया आस का दिल सामने तेरे हम आए है
गर चाहो बुझाओ अरमां मेरे तुमसे कहना पड़ेगा
नाकामियां मेरी बढ़ाने वाले सोचो कभी बढ़ा के
फासला कर फासला मैं जाऊं कहां सच कहना पड़ेगा