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फसाना ए महरूम जिंदगी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हक वफा का जता सकते हैं मगर बेवफा तुम्हें तो कह सकते नहीं बाद मुद्दत तुम मिले हो कुछ कह सकते नहीं
        
                                                    
                            
मजबूरी से बढ़ कर कोई सजा नहीं सकूं चार पल हमें मिला कभी नही सितम ये कि गिला हम कर सकते नहीं
ये ना सोचा लेकर जाऊं कहां फरियाद अपनी लाचारी की कोई दवा नहीं दर्द तुमसे भी हम कह सकते नहीं
बुझा दो अब इस चिराग ए मोहब्बत को बहुत सितम किया तूने मुझ पर होकर मजबूर कुछ कह सकते नहीं
मिला के खाक में खुशियां मेरी हुई नाकाम मुझको दुश्मन समझने वाले सह कर जुल्म तेरा कह सकते नहीं
3 घंटे पहले
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