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फसाना ए दिल ए नाकाम

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पराई नींद में सोने का तजुर्बा कभी हमसे तुम लिया करो होकर बेचैन मेरे हक में बददुआ इस तरह ना दिया करो
        
                                                    
                            
मैं चाहता हूं कभी खुल कर तुमसे ही बात करूं मुझ पे जता के हक वफा का कभी बेचैन इस तरह ना किया करो
कभी सोचा करूं भांप कर बेरुखी तेरी हमें तो मर जाना चाहिए था देख कर लाचारी जुल्म इस तरह न किया करो
हम आपके हैं कोई गैर तो नही बढ़ा के दर्द मेरा अपनी मर्जी के मुताबिक अरमां सारे तू इस तरह ना मिटाया करो
तूने क्या सोच के नजर अंदाज किया हमें बढ़ा देकर सदमें हमें हज़ार हमसे तुम इस तरह इल्तिज़ा ना किया करो

 
38 मिनट पहले
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jagdish bhandari

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