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फसाना ए दिल ए नाकाम

                
                                                         
                            पराई नींद में सोने का तजुर्बा कभी हमसे तुम लिया करो होकर बेचैन मेरे हक में बददुआ इस तरह ना दिया करो
                                                                 
                            
मैं चाहता हूं कभी खुल कर तुमसे ही बात करूं मुझ पे जता के हक वफा का कभी बेचैन इस तरह ना किया करो
कभी सोचा करूं भांप कर बेरुखी तेरी हमें तो मर जाना चाहिए था देख कर लाचारी जुल्म इस तरह न किया करो
हम आपके हैं कोई गैर तो नही बढ़ा के दर्द मेरा अपनी मर्जी के मुताबिक अरमां सारे तू इस तरह ना मिटाया करो
तूने क्या सोच के नजर अंदाज किया हमें बढ़ा देकर सदमें हमें हज़ार हमसे तुम इस तरह इल्तिज़ा ना किया करो

 
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25 मिनट पहले

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