विज्ञापन

हम आपके जब हैं नहीं तो क्यूं ऐतबार

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिटा के फिक्र अपनी किसी को भी दिल दिया नहीं करते होकर मगरुर राह ए तलब दीवार उठाया नही करते
        
                                                    
                            
मैं तो खुद ही बिकने को आ गया तेरी दुनिया में मिटा के हसरतें अपनी किसी को गुनहगार समझा नहीं करते
मैं ढल गया बदलते हालात में चुप हो जाता हूं देख के इस तरह किसी को कभी अदाकार समझा नहीं करते
राह ए जिंदगी सौदा जो किया तुमने गलत है नेक लोगों में गिना जाता हमें लेकर दर्द गद्दार समझा नहीं करते
हम आपके जब हैं नहीं तो क्यूं ऐतबार मुझ पर क्यूं इंकार करने से मिला क्या ये सच तुम समझा नहीं सकते
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7573 कविताएं

View Profile