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हम आपके जब हैं नहीं तो क्यूं ऐतबार

                
                                                         
                            मिटा के फिक्र अपनी किसी को भी दिल दिया नहीं करते होकर मगरुर राह ए तलब दीवार उठाया नही करते
                                                                 
                            
मैं तो खुद ही बिकने को आ गया तेरी दुनिया में मिटा के हसरतें अपनी किसी को गुनहगार समझा नहीं करते
मैं ढल गया बदलते हालात में चुप हो जाता हूं देख के इस तरह किसी को कभी अदाकार समझा नहीं करते
राह ए जिंदगी सौदा जो किया तुमने गलत है नेक लोगों में गिना जाता हमें लेकर दर्द गद्दार समझा नहीं करते
हम आपके जब हैं नहीं तो क्यूं ऐतबार मुझ पर क्यूं इंकार करने से मिला क्या ये सच तुम समझा नहीं सकते
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एक दिन पहले

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