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फसाना ए दर्द ए वफा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गर चाहो तो बढ़ा कर फासला रहो तुम दूर कहीं और मगर हमें तो आप गम ए जुदाई से हमेशा बचाते रखना
        
                                                    
                            
बढ़ा कर खुदगर्जी चैन ओ सकूं पा ना सकोगे जान के मिजाज़ वक्त का खुद को अब तू आईना दिखाते रहना
गुजरती जो दिल पे मेरे किसी और से कह ना कह ना पाए हम और तुम देख कर उदास दर्द और बढ़ाए रहना
मिली खुशी बहुत देख कर अचानक आज़ सामने तुम्हें बढ़ा के बेकरारी मेरी तुम तो रस्म ए वफा निभाते रहना
तुम्हें तो था नाज़ बहुत अपनी ही बेवफाई पर भुला के पिछली सारी यादें तुम चिराग़ ए दिल मेरा जलाते रहना
एक घंटा पहले
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