विज्ञापन

फसाना ए बिखरती यादें

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समेट कर बिखरती यादों को बढ़ा कर बेकरारी इक अर्ज तुमसे करना पड़ा ना रहे हम किसी काम के सोचना पड़ा
        
                                                    
                            
बुझा कर चिराग़ ए दिल बढ़ाओ मत तुम बेचैनियां मेरी चल के कांटों की राह पे हमें अब अंदाज़ तेरा सोचना पड़ा
सच तो ये भी दर्द मेरा तुमने कभी अपनी दर्द जाना कहां बढ़ा कर मायूसी दिल में हमें सच सारा अब कहना पड़ा
मेरी बर्बादियों पर हसने वाले क्या खोया क्या पाया सोचा नहीं कभी जान कर ईरादा आपका ये सच सोचना पड़ा
मिले कब मुझसे तुम खुशदिली से सोचा ये कहां तुमने जीने में रखा क्या है अंदाज ए बेरुखी आपका सोचना पड़ा
11 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7108 कविताएं

View Profile