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मत खेलो अठखेलियां मुझसे

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके ऐतबार तमन्नाओं पर दर्द बेशुमार अब हम बढ़ाए हैं मिले ना जब तुम तो करके दोस्ती कांटों से दर्द हम बढ़ाए हैं
        
                                                    
                            
हुआ अच्छा कब अंजाम ए वफा सोच के चिराग़ ए दिल भी हम बुझाए जो होना है हो के रहेगा फिर भी फर्ज निभाए हैं
कितने बदनसीब हम सोच ना कभी पाए हैं दर्द सिर्फ ये हुआ है अंज़ाम ए वफा अच्छा कब चिराग ए दिल हम बुझाए हैं
बढ़ा कर फासला हमें घुट घुट के जीना पड़ेगा दर्द ये रोने से भी फायदा नहीं सोच के नफा नुकसान फर्ज हम निभाए हैं
मत खेलो अठखेलियां मुझसे तुम अब और आकर तमन्नाओं के बहकावे में होकर मायूस हुआ हमें जो दर्द अभी बताए हैं
22 घंटे पहले
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