करके ऐतबार तमन्नाओं पर दर्द बेशुमार अब हम बढ़ाए हैं मिले ना जब तुम तो करके दोस्ती कांटों से दर्द हम बढ़ाए हैं
हुआ अच्छा कब अंजाम ए वफा सोच के चिराग़ ए दिल भी हम बुझाए जो होना है हो के रहेगा फिर भी फर्ज निभाए हैं
कितने बदनसीब हम सोच ना कभी पाए हैं दर्द सिर्फ ये हुआ है अंज़ाम ए वफा अच्छा कब चिराग ए दिल हम बुझाए हैं
बढ़ा कर फासला हमें घुट घुट के जीना पड़ेगा दर्द ये रोने से भी फायदा नहीं सोच के नफा नुकसान फर्ज हम निभाए हैं
मत खेलो अठखेलियां मुझसे तुम अब और आकर तमन्नाओं के बहकावे में होकर मायूस हुआ हमें जो दर्द अभी बताए हैं
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