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अहसास ए बेवफाई

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके लम्हें इंतजार के अरमां मेरा पामाल ना कर रही जिंदगी मेरी आसान कब बढ़ा के फासला इस्तेमाल मत कर
        
                                                    
                            
मेरी बर्बादियों पे हंसने वाले परखना तुम्हें आसान नहीं गुज़ार दी रात सारी तेरे इंतजार में दर्द और बहाल मत कर
सीखा है अपनी मुफलिसी से घुट घुट कर जीना करके मायूस तुम हमें बार बार खुशियां सारी मेरी पामाल मत कर
दौर ए मुश्किलों में काम कब कोई देख कर सामने नज़र झुका लिया तूने करके ऐसा तू दर्द अब और बहाल मत कर
सच तो ये है होकर मजबूर गिला शिकवा तुमसे मैं कर ना पाया कभी होकर मगरुर तू मुझसे अब कोई सवाल मत कर

 
एक घंटा पहले
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