करके लम्हें इंतजार के अरमां मेरा पामाल ना कर रही जिंदगी मेरी आसान कब बढ़ा के फासला इस्तेमाल मत कर
मेरी बर्बादियों पे हंसने वाले परखना तुम्हें आसान नहीं गुज़ार दी रात सारी तेरे इंतजार में दर्द और बहाल मत कर
सीखा है अपनी मुफलिसी से घुट घुट कर जीना करके मायूस तुम हमें बार बार खुशियां सारी मेरी पामाल मत कर
दौर ए मुश्किलों में काम कब कोई देख कर सामने नज़र झुका लिया तूने करके ऐसा तू दर्द अब और बहाल मत कर
सच तो ये है होकर मजबूर गिला शिकवा तुमसे मैं कर ना पाया कभी होकर मगरुर तू मुझसे अब कोई सवाल मत कर