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अहसास ए बेचैन जिंदगी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गर बिन मांगे किसी को मिला सब कुछ तो ख्वाहिश भी फिजूल है सूरज से रौशनी की गुजारिश भी फिजूल है
        
                                                    
                            
किसने कहा आपसे दरिया पार करो टूटी हुई कस्ती पे सच तो ये दरिया से आपकी गुजारिश भी फिजूल है
तेरी मर्जी के खिलाफ हो सकता नही अपनी मौत की तैयारी में हूं होकर अब मजबूर तेरी साजिश कुबूल है
ऐ आसमां मुझको तेरी इनायत की कोई जरूरत नहीं जी लेने दे हमें चैन ओ सकूं से तेरी नुमाइश फिजूल है
जी करता है कह दूं ज़माने से मंजिल चाहता हूं मगर तू मिलता ही नहीं होकर मजबूर सिफारिश फिजूल है
2 घंटे पहले
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