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दिल की ये आरज़ू

prem bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल की ये आरज़ू
        
                                                    
                            

दिल की ये आरज़ू थी कोई दोस्त प्यारा मिले
कहूं उससे दर्दे- दिल , मुझको भी सहारा मिले ।

अब तक भटक रहे थे इस बेदर्द जहां में हम
कोई ना अपना मिला जो मिले नागवारा मिले ।

हमने ना छोड़ी कसर अहदे-वफ़ा निभाने में
तोड़ते गए दिल जो भी मिले नाशुकराना मिले ।

तुझसे इश्क़ की आरज़ू में रहे ता-उम्र हम
ज़िन्दगी में रह गए कुछ पल अब यारा मिले ।

खामोश शहर , खामोश होने को है ज़ुबां हमारी
तुम्हारे आनेकी खुशी मनाएं या करें उलहाना -गिले ।

है आखिरी तमन्ना यही तेरी बाहों में निकले दम
सुकून - ए- ज़िन्दगी हमें भी तो एक बारा मिले ।

मौजु-ए-गुफ्तगु भी ना रहा अब तो कोई करते हैं दुआ
ग़र #प्रेम #को रफ़ीक मिले तो बेवफ़ा तुमसा ना मिले ।

प्रेम बजाज ©®
जगाधरी ( यमुनानगर)
4 वर्ष पहले
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