दिल की ये आरज़ू
दिल की ये आरज़ू थी कोई दोस्त प्यारा मिले
कहूं उससे दर्दे- दिल , मुझको भी सहारा मिले ।
अब तक भटक रहे थे इस बेदर्द जहां में हम
कोई ना अपना मिला जो मिले नागवारा मिले ।
हमने ना छोड़ी कसर अहदे-वफ़ा निभाने में
तोड़ते गए दिल जो भी मिले नाशुकराना मिले ।
तुझसे इश्क़ की आरज़ू में रहे ता-उम्र हम
ज़िन्दगी में रह गए कुछ पल अब यारा मिले ।
खामोश शहर , खामोश होने को है ज़ुबां हमारी
तुम्हारे आनेकी खुशी मनाएं या करें उलहाना -गिले ।
है आखिरी तमन्ना यही तेरी बाहों में निकले दम
सुकून - ए- ज़िन्दगी हमें भी तो एक बारा मिले ।
मौजु-ए-गुफ्तगु भी ना रहा अब तो कोई करते हैं दुआ
ग़र #प्रेम #को रफ़ीक मिले तो बेवफ़ा तुमसा ना मिले ।
प्रेम बजाज ©®
जगाधरी ( यमुनानगर)