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उम्मीद

Preeti Rai

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं हूँ उम्मीद तेरी; पता ये सबको है ,
        
                                                    
                            
लेकिन क्या तुझे पता है - तू अक्स है मेरी, तू ही मेरी छाया है!
हर सुबह देता तू मुझको आशा की किरण है,
इसी बात पे अर्पण तुझ पर ये मेरा जीवन है!
कोशिश है मेरी कि मैं साथ दूँ हर लम्हा तेरा,
जैसे है सजाया तूने मेरी ये साख और दिन मेरा!!


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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