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मैं आगे बढूंगी

Preeti Choudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब मैं आगे बढूंगी
        
                                                    
                            
आँखें जो आंसुओं से डबडबाई थीं अब तक, उन्हें पोंछ धुंधलका दूर करूंगी
हाथों में जो हथकड़ी हैं मर्यादा के नाम की, उन्हें तोड थामूंगी उनमें विश्वास
पैरों की बेडी जो सीमित किए है दायरा मेरा, काट फेंकूंगी उन्हें और कदम बढाउंगी विस्तृत की ओर
मैं अपने पर संभालूंगी और निकल पडूंगी अनंत की सैर करने
क्योंकि मेरी ऊंचाइयां मुझे बुलाती हैं।
एक वर्ष पहले
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