लहरों में डूबती कश्तियों का समंदर देखा
बीते हुए साल में डर डर के जीने का मंजर देखा
हर कदम कदम पे लोगो को संभल संभल के चलते देखा
आज वो साल भी बीत गया जिसमे हमने लोगो को गुजरते देखा
नया साल है आया नई उमंग लायेगा
फिर से सूखे हुए पत्तो को हरा भरा कर जाएगा
जितना खोया है हम सब ने वो सब लौट आएगा
नया साल आया है अब नई उमंग लायेगा
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