आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नया साल है आया नई उमंग लायेगा

                
                                                         
                            लहरों में डूबती कश्तियों का समंदर देखा
                                                                 
                            
बीते हुए साल में डर डर के जीने का मंजर देखा
हर कदम कदम पे लोगो को संभल संभल के चलते देखा
आज वो साल भी बीत गया जिसमे हमने लोगो को गुजरते देखा
नया साल है आया नई उमंग लायेगा
फिर से सूखे हुए पत्तो को हरा भरा कर जाएगा
जितना खोया है हम सब ने वो सब लौट आएगा
नया साल आया है अब नई उमंग लायेगा
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर