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क्यूँ नहीं जाता

Praveen Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करता था इबादत कभी दिन रात उसकी मै
        
                                                    
                            
अब जाने क्या है सजदे में सर क्यूँ नहीं जाता

जो लाख कोशिशों पे काम मुझसे न हुए
आकर के ऐसे काम को कर क्यूँ नहीं जाता

सदियों से ख़्वाब घुट रहा हैं आंख में मेरी,
पूरा नहीं होना है तो मर क्यूँ नहीं आता

बिछड़े हुए तो मुझको जमाना हुआ है दोस्त
फिर उसकी मोहब्बत का असर क्यों नहीं जाता

किस बात पर तू अपने लोगों से खफा है
बस इतना बता दे कि तू घर क्यों नहीं जाता

अल्लाह जाने किसकी नजर लग गई मुझको
मंजिल की तरफ मेरा सफर क्यों नहीं जाता

लगता है वो यहीं है, के जो है नहीं यहां
मन से मेरे उसका ये भरम, क्यूँ नहीं जाता ।
3 घंटे पहले
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