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"वक़्त की मुट्ठी में बिखरती ज़िंदगी"

Pratiksha Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिन रेत के कण हैं,
        
                                                    
                            
उम्र हथेली और वक़्त एक अनवरत हवा;
जितना समेटना चाहो,
उतना ही बिखरता जाता है जीवन।

- प्रतीक्षा शुक्ला
2 दिन पहले
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