विज्ञापन

स्वयं से मुलाकात

Prashant Dwivedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कई साल हो गए मुझको
        
                                                    
                            
ख़ुद से मिले हुए।
इन ज़िम्मेदारियों, इन ज़रूरतों के बीच
कहीं गुमशुदा सा हो गया हूँ मैं।
वक़्त मिला तो
मिलूँगा ख़ुद से कभी, पूछूँगा—
क्या सचमुच ऐसा ही था मैं?
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10797 कविताएं

View Profile

Ejaz Ahamad

122 कविताएं

View Profile