इन बहकती हवाओं में कुछ भी नहीं
अपने भारत से बढ़कर ये कुछ भी नहीं
सरहदों पर खड़े हैं जो प्रहरी बने
इनसे बढ़कर हमारे लिए कुछ भी नहीं
इनके होने से भारत की एक शान हैं
इनके होने से भारत की पहचान हैं
जब भी दुश्मन खड़े हो देश के सामने
इनके होने से दुश्मन भी बेकार है
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।