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देश के सैनिक

Pradyuman sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन बहकती हवाओं में कुछ भी नहीं
        
                                                    
                            
अपने भारत से बढ़कर ये कुछ भी नहीं
सरहदों पर खड़े हैं जो प्रहरी बने
इनसे बढ़कर हमारे लिए कुछ भी नहीं
इनके होने से भारत की एक शान हैं
इनके होने से भारत की पहचान हैं
जब भी दुश्मन खड़े हो देश के सामने
इनके होने से दुश्मन भी बेकार है


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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sushil pandey

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