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मोहब्बत

Pradyuman sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम लुटे इस कदर, आशिक़ी में तेरे
        
                                                    
                            
हम मिटे इस कदर, आशिक़ी में तेरे
मुस्कुरायी जो तुम, हम वहीं खो गए
वक़्त के पहलुओं में, हम ही खो गये

लत लगी महफ़िल में, तेरे लिए
धुंआ उड़ने लगा, चाहत के लिए
ग़म का मारा हुआ, नशे में छाया हुआ
हम लुटे इस जहां में, सनम के लिये

भावनाओं से मेरी, यूं खेलकर
दर्पण से मेरे दिल, को यूं तोड़कर
प्यार की इस डगर ,को यूं मोड़कर
कहां जाओगी तुम, हमें छोड़कर


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6 वर्ष पहले
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