खींचो तस्वीरें , खूब सारी तस्वीरें खींचो।
फूलों की, पत्तों की,
कलियों की, डालियों की,
पेड़ों की, पौधों की,
घास की, मिट्टी की,
आसमान की,
सुबह, दोपहर, शाम, रात की,
बादलों की,
उनके बदलते आकार और रंगों की,
सूर्योदय की,
सूर्यास्त की,
उसकी लालिमा की,
प्रज्वलित होती किरणों की,
तिरोहित होती रोशनी की,
चंद्रमा के रोज़ बदलते आकार की,
तारों की,
उनके नक्शत्रों की,
उड़ती चहकती चिड़ियों की,
रंगीन तितलियों की,
उछलती गिलहरी की,
फुदकते खरगोश की,
सुबह की ओस की,
सावन की बारिश की,
पिघलती-जमती बर्फ़ की,
झरनों की,
तालाबों की,
नदियों की,
समंदर की,
पानी की अनगिनत तस्वीरें,
और उनके बदलते रूप की,
उनकी गति की ठहराव की,
रेगिस्तान के मिट्टी के टीलों की,
चलते ऊँठों की,
उगते काँटों की,
पहाड़ों की,वादियों की |
समंदर के किनारे-
सीपियों की,
रेत पर बनते निशानों की,
लहरों के लौट जाने की,
और उनके फिर से लौटकर आने की।
आसमान में दमकती बिजली की,
तूफ़ान की, बवन्डर की,
हवा में उड़ते पत्तों की,
पतझड़ में बिछे पत्तों की,
रंग बदलते पत्तों की,
मिट्टी में मिलते पत्तों की,
सूखी डालियों की,
फलों से लदे पेड़ों की |
और फिर भूलो मत इंसानों और इमरातों को,
बाहर घूमते अनजान राहगीरों की,
खींचो तस्वीरें खिलते हुए चेहरों की,
बचपन की किलकारियों की,
बुढ़ापे के ठहरे हुए सुकून की,
जवानी के संघर्ष की,
दोस्तों की, प्रेमियों की,
परिवारों की, कुन्बों की,
सड़क पर बैठे रेड़ी वालों की,
घुमते रिक्शा चलाकों की,
मंदिरों की, मस्जिदों की,
बड़ी छोटी इमरातों की,
महालों की, किलो की,
नए पुराने ढान्चो की,
सडकों की, पथरियों की,
गाड़ियों की, हवाई जहाजों की,
दुनिया की हर नायब चीज़ की,
कलकृतियों की,
कलाकारों की,
त्योहारों की,
जुलूसों की,
सरहद पर खड़े फ़ौजीयों की,
चौराहे पर खड़े पुलिस वालों की,
खेत जोतते किसानों की,
अकेले चलती औरतों की,
भीड़ की, भगति गाड़ियों की,
परचुन की छोटी सी दुकान की ,
बड़े बड़े अलीशान माल की |
खींचो खूब सारी तस्वीरें,
क्योंकि वक्त बदल जाएगा,
आगे बढ़ता जाएगा,
पर ये लम्हे, ये प्रकृति, ये रिश्ते, ये ईमारतें,
इन तस्वीरों में अमर हो जायेंगे |
-प्रदीप्ति