विज्ञापन

मौत को भेजा यही पैग़ाम है , ज़िन्दगी ज़िन्दा दिली का नाम है

Pradeep Tiwari'Deep'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मौत को भेजा यही पैग़ाम है
        
                                                    
                            
ज़िन्दगी ज़िन्दा दिली का नाम है

बाल बांका भी नहीं होगा कभी
जब दुआएं माँ की आठो याम है

तब्सिरा जबसे किया है हुस्न पर
बे-वजह शाइर हुआ बदनाम है

आपकी गहरी निगाहें बा ख़ुदा
झील कोई या छलकता ज़ाम है

फिर से तामील-ए-समन का है मिला
इश्क़ करने का लगा इल्ज़ाम है

जीते जी किसको मिला चैन-ओ-सुकूँ
कब दम-ए-रुख़्सत मिला आराम है

'दीप' रोटी बस यही है मसअला
पेट की खातिर ही क़त्ल-ए-आम है
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
 
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10797 कविताएं

View Profile

Ejaz Ahamad

122 कविताएं

View Profile